समावेशी, सामाजिक न्याय, बहुलतावाद के सिद्धांत कमतर नहीं होने चाहिए : मीरा कुमार

नयी दिल्ली,  कांग्रेस सहित 17 विपक्षी दलों द्वारा घोषित राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार मीरा कुमार ने आज कहा कि राष्ट्रपति को समावेशी, सामाजिक न्याय एवं बहुलतावाद के मूल्यों का सम्मान करना चाहिए और यदि इन मूल्यों को कमतर किया जाता है तो हमारे संविधान का महत्व भी कम होगा।

मीरा ने आज एक बयान में कहा, Þ Þराष्ट्रपति पद के पास हमारे संवैधानिक सिद्धांतों की रक्षा करने की जिम्मेदारी होती है। इसमें हमारी सामाजिक राजनीतिक संस्कृति तथा हमारी समग्र विचाराधारा का नजरिया शामिल होता है। Þ Þ मीरा 27 या 28 जून को अपने नामांकन पत्र दाखिल कर सकती हैं जो प्रस्तावकों के हस्ताक्षर और अन्य दस्तावेज जमा करने की आखिरी तारीख है। उन्होंने कहा, Þ Þयह :राष्ट्रपति पद: जाति, धर्म एवं क्षेत्र के विचार से परे होता है। यह पद सांकेतिक नहीं होता : यह हमारे चुनावी दर्शन के आधार को उसके पूर्ण अर्थो में परिभाषित करता है कि अन्य सभी बातों पर क्षमता एवं अनुभव को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। Þ Þ पूर्व लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, Þ Þसमावेशी, सामाजिक न्याय एवं बहुलतावाद. ये मूल्य मुझे बहुत प्रिय हैं तथा हमारे राष्ट्र के सर्वोच्च प्रतिनिधि होने के नाते राष्ट्रपति को इन मूल्यों का सम्मान करना चाहिए। यदि इन मूल्यों को कमतर किया जाता है तो हमारा संविधान भी होगा :कमतर:। उसके बाद भारत उस प्रगतिशील आधुनिकता को हासिल करने की उम्मीद नहीं कर सकता जिसकी परिकल्पना इसके :संविधान के: निर्माताओं ने की थी और जो हम लोगों की सामूहिक इच्छाशक्ति में परिलक्षित होता है। Þ Þ उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव के निर्वाचक मंडल के सभी सदस्यों से इन अभिलक्षित सिद्धांतों को ध्यान में रख तथा हमारी भावी पीढ़ी के लिए इन्हें सुरक्षित रखने के मद्देनजर अपना निर्णय करने की अपील की।