इन छापों के पीछे भ्रष्टाचार की गंध तो है

राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव एवं उनके परिवार तथा पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम और उनके बेटे कार्ति चिदम्बरम के अनेक ठिकानों पर मारे गए क्रमशः आयकर विभाग एवं सीबीआई के छापों ने राजनीति में तूफान ला दिया है। एक ओर भाजपा इसे भ्रष्टाचार के विरुद्व उसकी शून्य सहिष्णुता का प्रमाण बता रही है तो विपक्ष इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई कह रहा है। तो सच क्या है? पहला सवाल तो यही उठता है कि क्या लालू यादव एवं पी. चिदम्बरम या उनके बेटे कार्ति चिदम्बरम इस समय भाजपा के लिए इतनी बड़ी चुनौती हैं कि उनको ठिकाना लगाने के लिए आयकर या सीबीआई का उपयोग करना पड़े? कोई भी निष्पक्ष व्यक्ति इसका उत्तर हां में नहीं दे सकता है। लालू यादव चाहे जो भी दावा करें कि सरकार उनसे डरती है धरातल पर ऐसा कुछ नहीं है। लालू यादव इस समय सजायाफ्ता हैंं और उन पर पहले से चारा घोटाले में चार मुकदमे चल रहे हैं। चिदम्बरम कांग्रेस के लिए बड़े नेता हैं लेकिन उनका राजनीतिक वजूद ऐसा नहीं है जिससे भाजपा को डरने की जरुरत हो। वे कह रहे हैं कि सरकार उनकी आवाज बंद करना चाहती है। वो बोलते और लिखते रहेंगे। आप अवश्य बोलते और लिखते रहिए लेकिन जिन मामलांें में छापे मारे गए हैं उनके बारे में भी तो कुछ बताइए। वास्तव में जो छापे मरें हैं उनको राजनीति प्रेरित तभी कहा जाएगा जबकि उसके पीछे भ्रष्टाचार की गंध बिल्कुल नहीं हो। क्या दोनों परिवारों के मामले ऐसे ही हैं?

पहले लालू प्रसाद यादव पर आते हैं। लालू यादव के परिवार पर आरोप है कि उन्होंने मुखौटा कंपनियां बनाकर करोड़ों की संपत्तियां बनाई। यही नहीं रेल मंत्री रहते हुए उन्होंने कई तरीकों से संपत्तियां हासिल की। सारे मामलों का विस्तार से यहां वर्णन नहीं किया जा सकता है। लेकिन उदाहरण के लिए दो मामले लेते हैं। लालू यादव की बड़ी बेटी तथा राज्यसभा सांसद मीसा और उनके पति शैलेश ने दिसंबर 2002 में मिशैल पैकर्स एंड प्रिंटर्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी बनाई और इसका रजिस्ट्रेशन लालू के सरकारी बंगले 25, तुगलक रोड, नई दिल्ली पर कराया गया। बैलेंस शीट के मुताबिक कंपनी की व्यावसायिक गतिविधियां 2006 में लगभग बंद हो गईं। इसके बाद साल 2008-09 में इसी कंपनी ने बिजवासन के 26 पालम फार्म्स में एक फॉर्महाउस 1.41 करोड़ रुपये में खरीदा। इसके लिए धन का इंतजाम कंपनी के 1,20,000 शेयर्स को बेच कर किया गया। कोई काम न करने वाली कंपनी के शेयर वीके जैन और एसके जैन नाम के दो कारोबारियों को 90 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से बेचा गया। ध्यान रखिए जैन भाइयों को इसी साल मार्च में कालेधन के खिलाफ की गई कार्रवाई में गिरफ्तार किया गया। इसके बाद एक साल से कम समय में ही यानी 2009 में मीसा और शैलेश ने इन शेयरों को फिर खरीद लिया। 90 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से बेचे गए शेयरों को इस बार सिर्फ एक या दो रुपये प्रति शेयर के हिसाब से खरीदा गया। आप खुद निष्कर्ष निकालिए। क्या आपको यह पूरा मामला एकदम पाकसाफ और पारदर्शी लगता है? नहीं न। तो इसकी जांच होनी चाहिए या नहीं? जैन बंधु हवाला कारोबारी माने जाते हैं। तो सवाल यह भी उठता है कि जैन बंधुओं ने किन कारणों से लालू की बेटी और दामाद को लाभ पहंुंचाया? इसके अलावा मीसा और शैलेश द्वारा एक और मुखौटा कंपनी के जरिए प्रॉपर्टी खरीदने का मामला सामने आया है। केएचके होल्डिंग्स कंपनी के नाम सैनिक फॉर्म्स में 2.8 एकड़ का फार्महाउस खरीदा गया। यह कंपनी विवेक नागपाल नाम के व्यक्ति की है जिनका व्यवसाय ही संदिग्ध रहा है। बाद में विवेक ने 10,000 शेयर सिर्फ एक लाख रुपये में मीसा और शैलेश को ट्रांसफर कर दिए। नापगाल ने ही केएचके होल्डिंग्स के जरिए सैनिक फार्म्स की संपत्ति खरीदी थी। आज वह संपत्ति मिसा और शैलेश की है।

कुल  मिलाकर आयकर विभाग ने लालू, उनके परिवार तथा उनसे जुड़े कुल 22 ठिकानांें पर छापेमारी की। आयकर विभाग के सूत्रों ने मीडिया को बताया कि उन्हें लालू परिवार के पास 1000 करोड़ से ज्यादा की बेनामी संपत्ति का शक है। आखिर 100 अधिकारियों की टीम ने छापा मारा तो यह यूं ही नहीं हो सकता। आयकर विभाग को भी जवाब देना होगा। अभी तो यह छापा दिल्ली सहित राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पड़े हैं। किंतु लालू यादव पर इसके अलावा भी आरोप हैं जो जांच की मांग करती हैं। दो आरोप तो यही है कि यूपीए 1 सरकार के अंदर कांति सिंह ने पटना का अपना तीन मंजिला मकान लालू परिवार को गिफ्ट कर दिया। क्यों? इसी तरह रघुनाथ झा ने गोपालगंज में संपत्ति परिवार को दिया। ये दोनों सरकार में मंत्री बनाए गए। तो क्या मंत्री बनाने के एवज में लालू ने इनसे संपत्ति लिखवाया? रेल मंत्री रहते हुए लालू पर झारखंड के रांची और ओडिशा के पुरी में रेलवे के दो होटल गलत तरीके से कारोबारी हर्ष कोचर को देने का आरोप है जिसके बदले पटना में 200 करोड़ रुपए कीमत की 2 एकड़ से ज्यादा जमीन बेनामी तरीके से डिलाइट मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड के नाम करवा ली। तब इस कंपनी का मालिकाना हक राजद सांसद प्रेम चंद्र गुप्ता के पास था। आज इस कंपनी में लालू के बेटे निदेशक हैं। पटना की इसी जमीन पर 7.5 लाख स्क्वेयर फीट में बिहार का सबसे बड़ा मॉल बनाया जा रहा है। लालू के मंत्री बेटे तेजप्रताप पर आरोप है कि इस अंडर कंस्ट्रक्शन मॉल की मिट्टी गलत तरीके से चिड़ियाघर को 90 लाख में बेच दिया। आरोप यह भी है बिहटा में शराब फैक्ट्री लगाने में मदद करने के बदले कारोबारी प्रकाश कत्याल ने एके इंफोसिस्टम्स नाम की कंपनी बनाकर उसके जरिए पटना में करोड़ों रुपए कीमत की जमीन खरीदी। बाद में कत्याल ने जमीन समेत कंपनी की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी लालू और उनके परिवार को दे दिया। मुंबई के कारोबारी अशोक बिंथिया ने भी कंपनी बनाकर दिल्ली में करोड़ों रुपए कीमत की जमीन और मकान समेत पूरी कंपनी लालू के छोटे बेटे और बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के नाम कर दी। तेजस्वी यादव की दिल्ली में 115 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्ति होने का आरोप है।  5 हीरा व्यापारियों ने बिना ब्याज के पांच करोड़ रुपये केबी एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को कर्ज दिया और फिर एबी एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने अपनी कंपनी के सारे शेयर लालू के परिवार वालों के नाम कर दिए। कोई कहे कि इन सबकी जांच होनी ही नहीं चाहिए तो उसे कुछ नहीं कहा जा सकता है।

अब आईए चिदम्बरम पिता पुत्र पर। सीबीआई ने मुंबई, दिल्ली, चेन्नई और गुड़गांव के अलावा चिदंबरम के चेन्नई स्थित नंगमबक्कम स्थित आवास और उनके होमटाउन कराइकुडी के घर पर छापा मारा। कुल 14 ठिकानों पर छापा बहुत बड़ी कार्रवाई है। सीबीआई का आरोप है कि चिदंबरम और कार्ति ने आईएनएक्स मीडिया को विदेशी निवेश दिलाने में पीटर-इंद्राणी मुखर्जी की अवैध तरीके से मदद की। सीबीआई ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के मामले में आईएनएक्स मीडिया को गलत तरीके से क्लियरेंस दिलाने के मामले में प्राथमिकी दर्ज किया है। इन पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और लोकसेवकों को प्रभावित करने का आरोप है। पीटर मुखर्जी और इंद्राणी उसके निदेशक थे। 2007 में इस कंपनी ने इसके लिए आवेदन दिया। इसे 2008 में 4.6 करोड़ के विदेशी निवेश की अनुमति मिली और इसके एवज में कार्ति की कंपनी को 10 लाख रुपए मिले। लेकिन कंपनी को विदेशी निवेश मिला, 305 करोड़ रुपया। उसके बाद कार्ति की कंपनी को 3.5 करोड़ दिया गया। कार्ति की कंपनी के नाम चेस मैनेजमेंट सर्विस और स्ट्रैटजिक कंसल्टिंग लि. कंपनी हैं।यह बात ठीक है कि विदेशी निवेश को मंजूरी देने वाले कागजात पर चिदम्बरम के हस्ताक्षर नहीं है। हो भी नहीं सकते। उस पर सचिवों के हस्ताक्षर होते हैं। इसके अलावा भी कार्ति चिदम्बरम पर आरोप है। आयकर विभाग द्वारा जांच के दौरान बरामद किए कागजों के माध्यम से यह स्पष्ट हुआ कि कार्ति के पास 14 देशों में फैला हुआ कारोबार है जहां उन्होंने रियल स्टेट तथा दूसरे व्यवसायों में निवेश किया हुआ है। जांच एजेंसियां कार्ति की मुख्य कंपनी एडवांटेज स्ट्रेटेजिक कंसल्टिंग की जांच कर रही हैं जो कि एयरसेल-मैक्सिस डील में शामिल थी। बरामद कागजात के अनुसार कार्ति द्वारा ज्यादातर सौदे और ट्रांजेक्शन एडवांटेज स्ट्रेटेजिक की सिंगापुर स्थित कंपनी से किए गए हैं। कार्ति के इन देशांेे में व्यवसाय संबंधी आरोपों की बड़ी फाइल प्रवर्तन निदेशालय एवं आयकर विभाग में भी बन गई है।

कुल मिलाकर कहने का तात्पर्य यह कि जो छापे मारे गए उन पर तत्काल संदेह करना उचित नहीं है। आरोप इतने गंभीर हैं तो उनकी जांच समूचा देश चाहेगा। देश की चाहत भी यही है कि अगर इन नेताओं और उनके परिवार ने अपने पद और प्रभाव का लाभ उठाकर देश को लूटा है तो उन्हें इसकी सजा मिलनी चाहिए। किंतु अब यह जांच एजंेंसियों की जिम्मेवारी है कि वे इसे साबित कर तार्किक परिणति तक ले जाएं। हमारे यहां न्यायालय में न्याय ही होता है। अगर ये छापे दुराग्रह से किए गए हैं तो ये स्वयं भी न्यायालय जा सकते हैं।

-अवधेश कुमार

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