भारत समेत दक्षिण पूर्व एशिया में 63 करोड़ लोग करते हैं दूषित जल स्रोतों का इस्तेमाल : डब्ल्यूएचओ

नयी दिल्ली, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आज कहा कि भारत समेत दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में करीब 63 करोड़ लोग पेयजल के दूषित स्रोतों का इस्तेमाल करते हैं।

डब्ल्यूएचओ ने कहा कि दुनियाभर में करीब दो अरब लोग मलयुक्त दूषित पेयजल के स्रोत का इस्तेमाल करते हैं, जिससे उन्हें हैजा, अतिसार, टायफॉयड और पोलियो का संक्रमण होने का खतरा होता है।

स्वच्छता समेत शुद्ध जल से संबंधित सभी मुद्दों के लिए संयुक्त राष्ट्र की समन्वय एजेंसी ‘यूएन-वाटर’ की ओर से प्रकाशित डब्ल्यूएचओ की एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनियाभर के देश 2030 तक पूरे करने के लिए निर्धारित टिकाउ विकास लक्ष्यों :एसडीजी: के तहत जल और स्वच्छता के लक्ष्यों पर काम करने के लिए अपने खचोर्ं को तेजी से नहीं बढ़ा रहे।

यूएन-वाटर ग्लोबल एनालिसिस एंड असेसमेंट ऑफ सेनिटेशन एंड ड्रिंकिंग वाटर :ग्लास: 2017 रिपोर्ट के अनुसार देशों ने पिछले तीन साल में पानी, स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी साफ-सफाई के लिए अपने बजट को सालाना औसत 4.9 प्रतिशत की दर से बढ़ाया है।

अस्सी प्रतिशत देश आज भी कहते हैं कि पानी, स्वच्छता और हाइजीन के लिए खर्च लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिहाज से अब भी अपर्याप्त है।

डब्ल्यूएचओ की सार्वजनिक स्वास्थ्य, पर्यावरण और स्वास्थ्य के सामाजिक निर्धारकों के विभाग की निदेशक मारिया नीरा ने कहा, ‘‘दूषित पेयजल हर साल डायरिया से पांच लाख से अधिक लोगों की मौत का कारण बन सकता है।’’

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