दवा बनाने के लिए उपयोगी कच्ची सामग्री के आयात पर निर्भरता घटाने के प्रयास जारी

नई दिल्ली : सरकार ने आज बताया कि वह ‘एक्टिव फर्मास्यूटिकल इन्ग्रेडियेंट’ :एपी)आई: के बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भरता घटाने के लिए काम कर रही है।  वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज शून्यकाल के दौरान एपी)आई के 90 फीसदी आयात के लिए दूसरे देशों पर भारत की निर्भरता को लेकर सदस्यों के चिंता जताने पर कहा कि दवा निर्माण के लिए कच्ची सामग्री के आयात पर भारत की निर्भरता गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस मुद्दे पर संज्ञान लिया है और एक देश विशेष से हमें खेप  मंगानी पड़ रही है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता का भी विषय है।

सीतारमण ने कहा कि इस बारे में कदम उठाए जा रहे हैं। कुछ विचारविमर्श किया जा चुका  है और खुद प्रधानमंत्री ने भी हमारे साथ चर्चा की है। उन्होंने कहा कि इस बारे में काम चल रहा है लेकिन वह फिलहाल कुछ नहीं बता पाएंगी। उन्होंने
सदन को आश्वासन दिया कि सरकार इसे बहुत गंभीरता से ले रही है।

पूर्व में भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रभात झा ने दवा निर्माण के लिए कच्ची सामग्री के बड़े पैमाने पर आयात की ओर सदन का ध्यान आकृष्ट किया। उन्होंने कहा कि 92 फीसदी एपी)आई का आयात किया जाता है और यह आयात मुख्यत: चीन से किया जाता है। चीन से आने वाले एपी)आई की दाम भारत में उत्पादित एपी)आई की तुलना में चार गुना कम होता है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए सुझाव दिया कि एक  मंत्रिस्तरीय समिति बना कर इस मुद्दे पर विचार किया जाना चाहिए।