एक जैसी खेती करने से बनेगा कृषि लाभ का धंधा

एक गांव के किसानों द्वारा एक जैसी खेती करने से ही किसानों को अपनी फसलों का सही मूल्य मिल पाएगा। इससे जहां एक ओर एक साथ क्रय करने से कृषि आदान अपेक्षाकृत कम कीमत में किसानों को प्राप्त होते हैं तथा दूसरी ओर उनकी फसल को बेचने में उन्हें कठिनाई नहीं होती। खरीददार को भी एकसी गुणवत्ता का माल एक ही स्थान से प्राप्त हो जाता है। इसके लिए एक गांव अथवा एक क्षेत्र के किसानों को अपनी “फार्मर पोड्यूसर कंपनी” अर्थात किसान उत्पादन कंपनी बनाकर एक साथ कार्य करना होता है।
संभागायुक्त श्री रवीन्द्र पस्तोर ने उज्जैन जिले के ग्राम चकरावदा के किसानों को बुधवार को गांव पहुंचकर यह सलाह दी। इस अवसर पर ग्राम के सरपंच, अन्य जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में‍किसान उपस्थित थे। संभागायुक्त ने लगभग डेढ़ घंटे किसानों से हुई चर्चा में उन्हें विस्तार से समझाया कि वे किस प्रकार अपनी फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी बनाएं, किस प्रकार कृषि आदान प्राप्त करें एवं किस प्रकार अपनी फसल को बेचें। इस दौरान उन्होंने किसानों के प्रश्नों के समाधानकारक उत्तर भी दिए। संभागायुक्त की इस चर्चा से किसान अत्यंत उत्साहित थे।
तीन स्थितियों में किसान बेचना है अपनी फसल

संभागायुक्त ने बताया कि किसान तीन स्थितियों में अपनी फसल बेचता है। पहली स्थित में पैसे की आवश्यकता होने अथवा फसल के खराब होने की चिंता होने पर तुरंत फसल जो दाम मिल जाए उसमें बेचता है। दूसरी स्थित में महीना-पंद्रह दिन रखकर जो भाव मिल जाए उसमें बेच देता है। तीसरी स्थित में भंडारण की कुछ सुविधा होने पर 5-6 माह में। तीनों ही स्थितियों में उस पर फसल जल्दी बेचने का दबाव होता है।

100 रूपये में से 22 रूपये मिलते हैं किसान को

संभागायुक्त ने बताया कि वर्तमान स्थिति में सामान्य रूप से किसान को 100 रूपये की फसल बेचने पर मात्र 22 रूपये मिलते हैं, जबकि शेष 88 रूपये दलाल और व्यापारियों के पास पहुंचते हैं। इसका मुख्य कारण है किसानों की विपणन के प्रति जागरूकता न होता, एकजुटता न होना एवं योजनाबद्ध तरीके से कार्य करने का अभाव।

“फार्म टू फैक्ट्री एण्ड फैक्ट्री टू फार्म एप्रोच”

संभागायुक्त ने किसानों का अपनी फसल का पूरा मुनाफा दिलाए जाने के लिए फार्म टू फैक्ट्री एण्ड फैक्ट्री टू फार्म का सूत्र बताया। इसके अंतर्गत किसान अपनी आवश्यकता का कृषि आदान सीधे फैक्ट्री से प्राप्त करता है तथा अपनी फसल को सीधे फैक्ट्री में बेचना है। इससे एक ओर उसे कृषि आदान अच्छी गुणवत्ता का कम कीमत में प्राप्त होता है वहीं अपनी फसल का मूल्य उसे अच्छा प्राप्त होता है।

ग्रेडिंग से अच्छा मूल्य

फसल का बेहतर मूल्य प्राप्त करने के लिए किसान को अपनी फसल की ग्रेडिंग करना आवश्यक है। किसाना गुणवत्ता एवं आकार के हिसाब से फसलों की ए, बी, सी, डी चार प्रकार की ग्रेडिंग करे तथा उनका मूल्य निर्धारित करे। फिर जैसी फसल जिस व्यापारी को चाहिए वैसी उसे बेचे।

“बेस मंडी फार्मूला, कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग” से बेहतर

श्री पस्तोर ने किसानों को बताया बेस मंडी फार्मूला कान्ट्रेक्ट फार्मिंग से बेहतर होता है। अर्थात किसानों की फसलों का मूल्य समीप की बड़ी मंडी के आधार पर निर्धारित हो। उस मंडी में जो मूल्य फसल का हो, उसी मूल्य पर किसान अपनी फसल बेचे। जैसे चकरावदा के लिए बेस मंडी हुई उज्जैन, उज्जैन मंडी के भाव पर किसान अपनी फसल बेचे। कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग में फसल का मूल्य कम-ज्यादा होने से सौदे टूट जाते हैं और किसान को बड़ा घाटा होता है। इससे बचा जाना चाहिए। यदि कॉन्ट्रेक्ट करना है तो इस बात का करें कि बेस मंडी के मूल्य पर ही फसल बिकेगी।

नौकरी में आने से पहले खेती करता था

श्री पस्तोर ने किसानों को बताया कि नौकरी में आने से पहले वे खेती करते थे। वे मूल रूप से किसान हैं तथा उनके गांव में जो कि टीकमगढ़ जिले में है, उनकी 80 एकड़ भूमि है, जिस पर खेती होती है। वर्तमान में प्रदेश में करीब 100 फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियां कार्य कर रही हैं, जिनको वे मार्गदर्शन देते हैं। उज्जैन संभाग के आगर-मालवा की फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी बहुत अच्छा कार्य कर रही है, जो एक वर्ष में लगभग 6 करोड़ का व्यवसाय कर रही है। उन्होंने किसानों से कहा कि वे आगर मालवा जाकर उसका कार्य देख सकते हैं। इसमें जिला पंचायत आगर उनकी मदद करेगी।

इस तरह कार्य करेगी फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी

संभागायुक्त ने बताया कि सबसे पहले एक गांव या एक क्षेत्र के किसान मिलकर एक फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी बनाएं। इस कार्य में कृषि विभाग उनकी मदद करेगा। इसके लिए जमीनों को मिलाने अथवा अन्य किसी प्रकार के अनुबंध की आवश्यकता नहीं है। हर किसान की जमीन, फसल एवं मुनाफा अलग-अलग रहेगा। केवल उन्हें एक साथ, एक ही स्थान से कृषि आदान प्राप्त करना होगा, एक जैसी फसल बोनी होगी तथा फसल का एकसाथ विपणन करना होगा।
फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी में सर्विस प्रोवाइडर उसी गांव के युवाओं को रखा जाएगा जो बहुत कम कमीशन पर कार्य करेंगे। ये कृषि आदान मंगवाने से लेकर फसलों को बेचने तक सारे कार्यों में किसानों की मदद करेंगे।
सारा कार्य ऑनलाइन होगा। किसानों की फसल का मूल्य सीधे उनके खाते में जमा हो जाएगा जिसकी सूचना उन्हें उनके मोबाइल पर आएगी। आदान क्रय से लेकर फसल बिकने तक किसानों को उनके मोबाइल पर कार्य संबंधी एसएमएस आते रहेंगे।
लगभग 1000 किसानों को जोड़कर एक स्थान पर गांव में ही एक सीसीडी अर्थात कलेक्शन एवं डिस्ट्रीक्यूशन सेंटर बनाया जाएगा। इस सेंटर में फसलों की ग्रेडिंग, गाड़ी तौले जाने, प्लेटफार्म आदि की सुविधाओं के साथ लगभग 35 सौ बोरियां रखने का गोडाउन भी बनाया जाएगा। इसकी लागत लगभग 1 करोड़ रूपये आएगी।
हर किसान को अपने खेत की मिट्टी का परीक्षण करवाना आवश्यक है। परीक्षण की रिपोर्ट के आधार पर उसमें डाले जाने वाले खाद आदि की मात्रा निर्धारित होगी।