मोदी युग की प्रचंडता और यूपी का चुनावी बहुमत

जैसे. जैसे.जैसे साल 2016 गुजराए सत्ता के गलियारों में शतरंज की बिसात अपने नए रंग में आ गई द्य केंद्रीय सत्तासीन दल भाजपा और विपक्ष में कांग्रेस सहित सपाए बसपा आदि के राजनीतिक पंडित अपनी.अपनी गोटियां उत्तरप्रदेश में फिट करने को उतारू हो चले थे द्य जी हांए साल 2017 देश के सबसे बड़े राज्य के विधानसभा चुनाव का साक्षी बना और उत्तरप्रदेश की राजनीति के बारे में एक कहावत प्रचलित भी है कि ष्यूपी की राजनीतिक बिसात ही केन्द्रीय कद का खाका तय करती हैद्यष्

अर्पण जैन ‘अविचल’

अक्षरसरू सत्य भी हैए लोकसभा चुनावों में भी अमित शाह का उत्तरप्रदेश में चुनावी दांव ही आज उनके और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कद्दावर कद का कारण बना है और वहीं रंग विधानसभा चुनावों में आए परिणामों में झलक गया द्य जब बात मुख्यमंत्री चुनने की आई ए तब उन्होने चुना पूर्वांचल के तेजतर्रार हिन्दुवादी नेता के तौर पर प्रसिद्ध कद्दावर नेता श्योगी आदित्यनाथश् को  जातिगत समीकरणों की गोटियों को फिट करने की कवायद ज़रूर की है ए जहाँ दो उपमुख्यमंत्री का चुनाव और मंत्रिमंडल का गठन द्य इन सब पर हावी रहा रामराज्य की परिकल्पना का दस्ताना  आजमगढ़ए मऊए गाज़ीपुर और भी कई कुख्यात क्षेत्रए जहाँ की अपराधग्रस्त सियासत अक्सर धुरंधरों को भी गच्चा दे जाती थीए फिर भी भाजपा को नसीब हुआ प्रचंड बहुमत का साम्राज्यद्य सभी समीकरणों पर भाजपा के राजनीतिक पंडितों का दाँव भारी रहाए और विरोधियों को मुँह की खानी पड़ी द्य

कुछ तो बात है सरयू के पानी में कि वहां का राजनीतिक रंग देश को प्रभावित जरूर करता है और जिस पर चढ़ जाता है ताउम्र हावी भी रहता है। इतिहास के पन्नों में भी उत्तरप्रदेश के राजनीतिज्ञ सदा से ही हावी रहे हैंए वो चाहे राममनोहर लोहिया का समाजवाद होए चाहे समग्र क्रांति का सूत्र। हालात बदले जरूर हैंए पर बिसात पर आज भी मोहरें उत्तरप्रदेश के ही ज्यादा खेलते हैं। मुलायम सिंह का राजनीतिक करियर आज भी जिन्दा रहने का कारण यूपी की तासीर है। टीम मोदी का अपना आंकलन.अपना समीकरण है।
इस हालात पर एक शेर याद आता है.

ष्मैंने अपने कमरे की सारी खिड़कियाँ खोल रखी हैं
सुना हैए हवाएं तुम्हारे शहर से होकर आ रही है….

जातियों के जंगल में चुनावरू
क्षेत्रफल और लोकसभा सीटों के हिसाब से भी पूरे देश में उत्तर प्रदेश सबसे बड़ा प्रदेश हैद्य उत्तरप्रदेश की बड़ी सीमा बिहार से लगती है और बिहार से उत्तरप्रदेश का गहरा सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव भी हैद्य साथ ही जातिगत समीकरण चुनाव रणनीतियों में भारी रहते हैं द्य भूमियारए ब्राह्मणए राजपूतए कायस्थए यादवए अल्पसंख्यक आदि जातियों का ख़ासा वोटबैंक चुनावी रणनीतिकारों को मशक्कत करवाने में सफल रहता हैद्य बिहार विधानसभा चुनावों में वोटरों का मिजाज भांपने में पूरी तरह से फेल हुई भाजपा भी यूपी में कोई जोखिम उठाने को तैयार नहीं रहीए भाजपा ने प्रत्याशी चयन से लेकर मंत्रिमंडल के गठन तक जातिगत आधारों पर तौल कर समीकरण बनाए द्य

नेताजी को परिवारवाद का जिन्न ले डूबारू

उत्तरप्रदेश में जातिवाद के बाद यदि कोई बड़ा फैक्टर है तो वह है परिवारवाद द्य बीते दिनों जिस तरह से मुलायमसिंह कुनबे में कलह दिख रही थी वो सपा के राजनीतिक हथकंडों की लुटिया डुबोने की साजिश ही हैद्य अखिलेश और शिवपाल के कारण नेताजी से तनातनी और इसी बीच अमरसिंह की खामोशी एक साथ सभी रंग दिखा रही थीद्य सत्य भी हैए जिस परिवार में पटवारी से लेकर मुख्यमंत्री तक सब के सब मौजूद हों वहां आत्मसम्मान की लड़ाई होना लाजमी है द्य अखिलेश की मेट्रो परियोजना पर नेताजी का परिवार प्रेम भारी रहा द्य
मथुरा के जवाहरबाग कांड के दौरान भी ये सार्वजनिक हुए और माफिया सरगना मुख्तार अंसारी की सपा में इंट्री रोकने को लेकर भीद्य वैसे पूरे सत्ताकाल में प्रशासनिक सुस्ती को छोड़ देंए तो उनके खिलाफ घपले.घोटाले का कोई आरोप नहीं है और उनकी व्यक्तिगत छवि बेदाग हैए लेकिन मुजफ्फरनगर दंगों के बाद से ही बिखरा पार्टी का समीकरण दुरुस्त नहीं हो रहा थाद्य इससे चिंतित मुलायमए अमर सिंह व बेनी वर्मा जैसे नेताओं को घर वापस लाए हैंए जबकि पहले कहते थे कि नेताओं के नहींए जनता के जमावड़े में यकीन करते हैं द्य पार्टियों में स्थिर होता वंशवाद राजनीति की मटीयामेल करने के लिए काफ़ी हैद्य नेताजी अंततरू परिवार मोह में उलझे रहे और कांग्रेस के साथ हो गयेए कुछ कारण तो यह भी रहा क़ि सपा का सफ़ाया हो गया द्य

भारी रही बसपा की खराब श्सोशल इंजीनियरिंग

मायावती चार बार प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं द्य अखिलेश से पहले सियासत में सामाजिक इंजीनियरिंग के सफल प्रयोग के जरिए उन्होंने पांच साल यूपी में राज किया हैद्य अंबेडकर के नाम पर सियासत करने वाली दलित की इस बेटी को उनके विरोधी दौलत की देवी बताकर तंज कसते हैंए लेकिन इस दलित नेत्री ने अनेक दलितों और वंचितों को दोबारा पहचान दिलाई द्य दलित उत्थान में योगदान करनेवाले कई सामाजिक क्षत्रपों की मूर्तियां इतिहास के पन्नों से निकलकर 21वीं सदी में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही हैए तो यूपी में इसकी वजह मायावती ही हैद्य हालांकि बीते शासनकाल में मूर्तियों और स्मारकों के निर्माण में बड़े पैमाने पर हुए भ्रष्टाचार की वजह से ही उन्हें सत्ता गंवानी पड़ीद्य अब तमाम विवादों और आरोपों को दरकिनार कर मायावती ने पांचवीं बार प्रदेश के मुख्यमंत्री की गद्दी पर अपना दावा तो ठोका पर किस्मत के साथ.साथ खराब सोशल इंजीनियरिंग उन्हे ले डूबी द्य

नहीं चली कांग्रेस के साथ प्रशांत किशोर की कलाकारी

नेतृत्व से लस्त.पस्त कांग्रेस अब अलगदृअलग जाति.धर्मों के चेहरे आगे कर रही थीए ब्राह्मण मुख्यमंत्री उम्मीदवारए अल्पसंख्यक नेता गुलामनबी आजाद प्रदेश प्रभारीए सिनेस्टार राजबब्बर प्रदेश अध्यक्षए ठाकुरों के क्षत्रप संजय सिंह समन्वयकए तो ब्राह्मण प्रमोद तिवारी प्रचार प्रभारीद्य उम्मीद भी कायम थी क़ि ष्बेटी प्रियंकाष् आ जाएंगीए तो डंका बज उठेगाए लेकिन यह भी सब हवादृहवाई निकलाद्य पार्टी संगठन की जमीनी हालत खराब है और उसमें समान आधार वाली भाजपा की बढ़त रोकने का जज्बा भी नहीं दिखा द्य
कांग्रेस ने मोदी और नीतीश के पुराने राजनीतिक चाणक्य रहे प्रशांत किशोर और टीम पर अपना भरोसा जताया हैद्य कांग्रेसी युवराज राहुल भी इस समय किशोर की रणनीतियों पर ख़ासा ध्यान दे रहे थेए किन्तु उत्तरप्रदेश की राजनीतिक तासीर बहुत गहरी समझ वाली और जाति के दल.दल में फंसी होने से सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर भारी हैद्य कांग्रेस की कई उम्मीदों पर पानी फेरती संप्रदायवाद की ताकत आज अपने चरम पर है

यूपी में चल गया मोदी का कालाधान मिटाओ का फंडा
अचानक से मोदी की आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक और 500.1000 के नोट बंद करने का फरमान कुछ सियासतदानों को तुगलकी फरमान तो लगा और मोदी को बिन तुगलक की उपमा से नवाज भी दियाए किन्तु आमजन की राय कुछ अलग ही हैद्य वो परेशान हुआ हैए पर वो इस बात से बहुत खुश भी है क़ि कालाधन और जमाखोरी कम होगीद्य जनता की पुकार थी क़ि कालाधन आएंए जमाखोरी बंद होए ग़रीब और ग़रीब ना होए और अमीर अपनी मेहनत से कमाएंए यही सब कारणों से जनता मोदी के इस आर्थिक स्वच्छता अभियान को बल दे रही हैद्य
बहरहालए इन सभी आंकलन और अन्वेंशन पर उत्तरप्रदेश की तुर्क तासीर भारी रहीद्य आखिरकार देश के राजनीतिक रंग को कहीं लालए कहीं भगवाए कहीं हरे का रंग चढ़ाया जा रहा है। वैसे उत्तरप्रदेश की शतरंजए रामजन्मभूमि और अखलाख की कहानी की भी गवाह है।

भाजपा ने योगी पर चलाया अपना राम राज्य का दाँव
फायरब्रांड छवि को सत्ता सिरमोर बनानाए सरयू के पानी ने फिर एक बार राजनीति को पलटवार देते हुए नया रंग दियाण्ण्ण्अब चाणक्य ही चंद्रगुप्त बने हैंण्ण्ण् आज वाकई समय ने ही इस तर्क को बल अर्पण करते हुए इसकी सत्यता को साबित भी कियाण्ण्ण्ण् इस बात से भी नकारा नहीं जा सकताए जैसे मध्यप्रदेश में उमा भारती जी को सत्ता सौंपी गई थीए वैसे ही योगी के चेहरे को ढाई साल तक भुनाया भी जाएण्ण्ण् अभी तो यमुना के रंग से सरयू की सियासत होगी और मजा भी आएगाण्ण्ण्
विधानसभा चुनाव शायद मोदी के भाग्य और 2019 के आमचुनाव का एक खाका जरूर रेखांकित कर गयाए इतना तो तय हैए मोदी युग उफान पर है ए उत्तरप्रदेश सहित चार राज्यों में सरकार बना कर मोदी ने देश के तमाम राजनीतिक प्रकाण्ड हुतात्माओं और मोदी विरोधियों के मुँह पर तमाचा तो मार ही दिया

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