अंतिम संस्कार: शमशान बनाम कब्रिस्तान

ऐसी मान्यता है कि मानव का शरीर जिन पांच तत्वों से मिल कर बना है वे हैं मिट्टी,अग्रि,जल,वायु तथा आकाश। विश्वभर में पाए जाने वाले विभिन्न धर्मों तथा विश्वासों के लोग अपने-अपने परिजनों को मरणोपरांत अपने-अपने धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ उनके अंतिम संस्कार किया करते हैं। निश्चित रूप से अंतिम संस्कार का तरीका अथवा विधि-विधान जो भी हो परंतु यह सत्य है कि मानव का यह शरीर प्रत्येक संस्कार विधि के द्वारा  किसी न किसी रूप में मिट्टी,अग्रि,जल,वायु तथा आकाश में समाहित हो ही जाता है। विभिन्न धर्मों के पूवर्जों द्वारा अंतिम संस्कार करने के जो भी तरीके अपनाए गए हों परंतु उन सभी का मुख्य उद्देश्य एक ही था कि किसी भी तरह से इस मृत मानव शरीर के अस्तित्व को समाप्त कर दिया जाए। मृतक शरीर को अग्रि के हवाले करना,उसे मिट्टी में दफन करना,नदी अथवा समुद्र में प्रवाहित कर देना,समाधि बनाना,गुफा में छुपा कर रख देना अथवा दूसरे जीवों या पक्षियों के भोजन हेतु मृतक के शरीर को परोस देना आदि विभिन्न धर्मों में अंतिम संस्कार की अलग-अलग विधियां अिख्तयार की जाती हैं। विश्व की दो सबसे बड़ी जनसंख्या ईसाई तथा मुस्लिम समुदाय के लोग अपने मृतक परिजनों को अलग-अलग विधियों से कब्रिस्तान में ज़मीन में दफन करते हैं जबकि हिंदू धर्म में जहां मृतक शरीर को मरणोपरांत अग्रि की भेंट किए जाने की परंपरा है वहीं छोटे बच्चों के मृतक शरीर को भी ईसाई व मुस्लिम लोगों की ही तरह ज़मीन में दफन कर दिया जाता है। हिंदू समुदाय में ही नदियों के किनारे बसने वाले तमाम शहरों,कस्बों व गांवों में गरीब लोगों द्वारा मृतकों को पानी में प्रवाहित कर भी अंतिम संस्कार किया जाता है।

तनवीर जांफरी

हमारे देश की वह निकम्मी राजनीति जो आम लोगों को स्कूल,अस्पताल तथा भरपेट भोजन देने की व्यवस्था नहीं कर पा रही है,जनता को वरगलाने के लिए सांप्रदायिकता फैलाते हुए दंगे-फसाद करने तथा अब दंगे-फ़साद से भी आगे बढक़र कब्रिस्तान व शमशानघाट तक ले आई है। सांप्रदायिकता फैलाने के विशेषज्ञ ठेकेदारों द्वारा अब यह मांग की जा रही है कि भारत में कब्रिस्तान समाप्त किए जाएं और मुस्लिम समुदाय के लोग भी अपने परिजनों की मृतक लाशों को जलाकर उनका अंतिम संस्कार करें। स्वयं को संत बताने वाले भाजपा सांसद साक्षी द्वारा पिछले दिनों उत्तर प्रदेश में चल रहे चुनाव के दौरान धार्मिक आधार पर मतों के ध्रुवीकरण के प्रयास के अंतर्गत् इस प्रकार का शगूफा छोड़ा गया। साक्षी के इस बयान के साथ ही उनकी विचारधारा का पोषण करने वाले हिंदूवादी संगठनों के कई कलमकारों द्वारा भी उनके समर्थन में उन्हीं की भाषा में कुछ आलेख भी लिखे गए जिसमें साक्षी की चिंताओं को ही परवान चढ़ाने की कोशिश की गई है। साक्षी ने व उनके समर्थकों ने देश में यह गलतफहमी फैलाने की कोशिश की कि यदि सभी मुसलमानों को कब्र में दफन किया जाएगा तो पूरे भारत में हर जगह कब्र व कब्रिस्तान ही हो जाएगा और किसी को रहने की जगह ही नहीं मिलेगी। इस प्रकार का बयान न केवल अफवाह फैलाना बल्कि समाज को वरगलाना समाज में गलतफहमी पैदा करना तथा मुस्लिमों के रीति-रिवाजों में अपनी अज्ञानता का प्रदर्शन करने के सिवा और कुछ नहीं। कथित संत एवं भाजपाई सांसद साक्षी के इस बयान का विरोध हालांकि मुस्लिम समुदाय के लोगों से कहीं अधिक हिंदू धर्मगुरुओं द्वारा ही किया गया है। वे साक्षी के बयान को हिंदू धर्मगुरुओं के बयान अथवा उनकी ऐसी किसी मंशा से अलग रखना चाहते हैं। इस संदर्भ में कुछ वास्तविकताएं ऐसी हैं जिनका अध्ययन बयान देने से पूर्व साक्षी को करना चाहिए था। मुस्लिम धर्म में बावजूद इसके कि तमाम कब्रिस्तानों में तमाम लोगों द्वारा अपने रुतबे व धन-दौलत के बल पर पक्की कब्रें ज़रूर बनाई गई हैं परंतु धार्मिक लिहाज़ से किसी भी कब्रिस्तान में किसी भी मुसलमान को अपने मृतक परिजन की पक्की कब्र बनाए जाने की कतई इजाज़त हासिल नहीं है। दूसरी ओर किसी एक मृतक शरीर के दफन होने के बाद पूरी तरह से उस शव को मिट्टी में समाहित हो जाने में पांच से लेकर आठ वर्ष तक का समय लगता है। इस अवधि के बाद वही कब्र पहले जैसी ही हो जाती है। और इसी स्थान पर दूसरी कब्र खोदी जा सकती है। आज भारतवर्ष में जितने भी कब्रिस्तान हैं उनमें कहीं भी ऐसा कोई समाचार सुनने को नहीं मिल सकता कि कब्र की संख्या बढऩे की वजह से कब्रिस्तान की चाहरदीवारी को भी आगे बढ़ाना पड़ा हो। हां ऐसे समाचार ज़रूर सुनने को मिल जाएंगे कि कब्रिस्तान की ज़मीन पर स्वयं मुसलमानों द्वारा या कहीं-कहीं गैर मुस्लिमों द्वारा कब्ज़ा कर लिया गया हो और उस ज़मीन पर अपना घर या कारोबार हेतु स्थान बना लिया गया हो।

दूसरा सवाल साक्षी से ही यह है कि हमारे देश में औसतन प्रत्येक वर्ष हिंदू समुदाय के पांच वर्ष से कम आयु के पंद्रह लाख बच्चे प्राण त्याग देते हैं। ज़ाहिर है उन्हें शमशानघाट में ही ज़मीन में दफन कर दिया जाता है। क्या उन मृतक बच्चों की वजह से हिंदू कब्रिस्तान की ज़मीन बढऩे की खबर कहीं सुनाई दी है? यदि कब्र की वजह से देश की ज़मीन कब्रिस्तान के रूप में बदलती जा रही है तो हिंदू बच्चों की मृत्यु के कारण भी यह समस्या साक्षी के कथनानुसार सामने आनी चाहिए। परंतु ऐसी कोई खबर अभी तक सुनने में नहीं आई। वैसे भी स्वयं को महाराज कहलवाने का शौक रखने वाले साक्षी को एक सांसद के नाते उस भारतीय संविधान का अध्ययन ज़रूर करना चाहिए था जिसके अनुच्छेद 25 में भारत के प्रत्येक नागरिक को उसकी अपनी पसंद के धर्म के उपदेश,उसके अभ्यास व उसके प्रचार की स्वतंत्रता की गारंटी दी गई है। इसके अतिरिक्त भारतीय संविधान के अनुच्छेद 26 के मुताबिक देश के समस्त धार्मिक संप्रदायों को उनकी सार्वजनिक व्यवस्था,नैतिकता तथा स्वास्थय के अधीन स्वप्रबंधन की गारंटी दी गई है। हमारे संविधान की इस व्यवस्था का उल्लंघन करने वाला बयान देना कम से कम देश के संविधान के मंदिर रूपी लोकसभा हेतु निर्वाचित किसी सांसद को कतई शोभा नहीं देता कि वह किसी दूसरे धर्म या समुदाय के लोगों को उनकी अपने रीति-रिवाजों से अलग हटकर किसी दूसरे रीति-रिवाजों पर चलने की सलाह दे। और ऐसी सलाह जो गलत,निराधार,तर्कहीन ही नहीं बल्कि उसके ऐसे प्रयासों से समाज में बदअमनी तथा बेचैनी का माहौल पैदा हो?

आज हमारे ही देश में हिंदू समुदाय से संबंधित जो लोग अपने मृतक परिजनों के शवों को नदियों में प्रवाहित कर देते हैं उसके पीछे मुख्य कारण गरीबी है। वे चिता हेतु पर्याप्त लकड़ी का प्रबंध नहीं कर सकते इसलिए नदी में लाश को प्रवाहित करना ही उनके लिए सबसे सुगम उपाय होता है। हमारे देश में कई पिछड़े इलाके ऐसे भी हैं जहां गरीबी के चलते संस्कार हेतु पर्याप्त लकड़ी उपलब्ध नहीं हो पाती और परिणामस्वरूप लाशें आधी-अधूरी ही जल पाती हैं। चिता जलाने के चलते होने वाले वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने व पेड़ों की कटान को रोकने की गरज़ से ही विद्युत शवदाहगृह की शुरुआत की गई है जो देश में सैकड़ों शमशानगृहों में मौजूद हैं। लिहाज़ा साक्षी जैसे धर्मगुरु व राजनेता को चाहिए कि वे संविधान की अवहेलना करने तथा देश में गैर जि़म्मेदाराना बातें कर समाज में कभी मुस्लिमों की जनसंख्या बढऩे तो कभी पूरे देश की ज़मीन कब्रिस्तानों में समा जाने जैसा झूठा भय फैलाने की प्रवृति को छोडक़र अपने ही समाज की रीतियों में सुधार लाने तथा उसके सामने आ रही समस्यओं से निजात दिलाने के उपायों पर अपनी उर्जा खर्च करें।