बंटवारे और महिलाओं पर अधिक फिल्में न बनाये जाने से हैरान हैं विद्या

मुंबई, अभिनेत्री विद्या बालन का कहना है कि उनकी आने वाली फिल्म ‘बेगम जान’ बंटवारे के दौरान महिलाओं की स्थिति को दर्शाने वाली एक अनोखी फिल्म है। फिल्म में विद्या भारत के बंटवारे की मार झेलनी वाली एक महिला की भूमिका में हैं जो एक वेश्यालय चलाती है।

यह फिल्म निर्देशक श्रीजीत मुखर्जी की बंगाली फिल्म ‘राजकहानी’ का हिंदी रूपांतरण है।

फिल्म की कहानी एक वेश्यालय में रहने वाली महिलाओं के जीवन पर आधारित है जो बंटवारे के दौरान बनी नयी नियंत्रण रेखा से खुद को भी बंटा पाती हैं। नयी नियंत्रण रेखा से उनके आधे घर भारत और आधे घर पाकिस्तान में चले जाते हैं जिसके बाद वे अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ती हैं।

विद्या ने पीटीआई भाषा से कहा, ‘‘हमें बंटवारे के बारे में जो भी जानकारी है वे बस पाठ्यपुस्तकों से ही मिली है। बंटवारे पर अधिक फिल्में नहीं हैं, विशेषकर महिलाओं पर कि उस दौरान उन्हें क्या-क्या झेलना पड़ा। इसलिए यह एक दिलचस्प कहानी है। ’’ राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेत्री ने कहा कि जहां तक फिल्म की कहानी की बात है, इसमें कई ‘‘ भावनात्मक एवं मानसिक’’ हिंसक पहलू दर्शाए गये हैं जो उनके लिये दृढ़तापूर्वक फिल्मा पाना काफी मुश्किल रहा।

फिल्म के हाल ही में जारी पहले पोस्टर को काफी वाहवाही मिल रही है।

‘बेगम जान’ में नसीरूद्दीन शाह, ईला अरूण, पल्लवी शारदा, रजित कपूर, गौहर खान, आशीष विद्यार्थी, विवेक मुशरान और चंकी पांडे जैसे अभिनेता भी हैं।

फिल्म के बड़े पर्दे पर 14 अप्रैल को रिलीज होने की उम्मीद है।