ट्यूमर से हड्डियां कमजोर होने के दुर्लभ मामले में सफल सर्जरी

नयी दिल्ली, दिल्ली के एक अस्पताल में ऐसे रोगी का सफलतापूर्वक उपचार किया गया है जिसे एक दुर्लभ ट्यूमर संबंधी समस्या की वजह से हड्डियों की कमजोरी का सामना करना पड़ रहा था और यहां तक व्हीलचेयर पर चलना पड़ रहा था।

41 वर्षीय रोगी को ट्यूमर इंड्यूस्ड ओस्टोमेलेशिया :टीआईओ: की समस्या थी जिसमें ट्यूमर की वजह से अस्थिभंगुरता की दुर्लभ स्थिति पैदा हो जाती है और छोटा सा एक ट्यूमर हड्डियों को बहुत कमजोर और मुलायम बना देता है। इसके परिणामस्वरूप हड्डियां टूटने या फ्रेक्चर का खतरा बढ़ जाता है।

इस समस्या में छोटा सा एक मृदु उतक या हड्डी का ट्यूमर शरीर में विकसित हो जाता है और इसके कारण उत्पन्न एक तत्व फॉस्फेट के अवशोषण को रोक देता है। इससे होता यह है कि हड्डियां अत्यंत कमजोर होने के साथ साथ उनमें कुछ जैविक विसंगतियां उत्पन्न हो जाती हैं।

द्वारका स्थित वेंकटेश्वर अस्पताल के डॉक्टरों ने इस शख्स का सफल उपचार किया। अस्पताल का दावा है कि अभी तक इस तरह की बीमारी के 150 मामले ही सामने आये हैं।

अस्पताल के एक बयान में कहा गया कि इस तरह की दुर्लभ स्थिति का पता चल पाना बहुत कठिन होता है और उक्त रोगी कई जगह डॉक्टरों को दिखा चुके थे लेकिन विशेषज्ञ समस्या की जड़ में नहीं पहुंच पा रहे थे।

अस्पताल के एंडोक्रोनोलाजिस्ट डॉ दीप दत्ता ने कहा, ‘‘हमने रोगी को फॉस्फेट की ओरल हाई डोज देनी शुरू की जिससे उनके पैरों में मजबूती आई। जब धीरे धीरे थोड़ा सुधार दिखाई दिया तो इस समस्या की वजह खोजी गयी।’’

डॉ दत्ता ने कहा, ‘‘हमें लगातार इलाज के दौरान ट्यूमर इंड्यूस्ड ओस्टोमेलेशिया :टीआईओ: का अंदेशा हुआ। एफडीडी-पीईटी स्कैन में यह शक सही साबित हुआ। अधिकतर मामलों में इस तरह के ट्यूमर धीरे धीरे बढ़ते हैं और अधिकतर छिपे रहते हैं और इनका पता नहीं चल पाता।’’ रोगी जब अस्पताल पहुंचा था तो उनकी टांगों में कमजोरी थी और फ्रेक्चर होने की वजह से वह व्हीलचेयर पर थे। जांच में पता चला कि उनका सीरम फॉस्फोरस स्तर बहुत कम है। फॉस्फोरस हड्डियों के लिए कैल्शियम की तरह जरूरी होता है।

पड़ताल के बाद हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ आर के पांडेय ने सर्जरी करके सफलतापूर्वक ट्यूमर निकाला।

डॉ दत्ता के अनुसार सर्जरी के 24 घंटे के अंदर हमने मरीज में फॉस्फोरस के स्तर में बढ़ोतरी देखी और उनकी शारीरिक क्षमता में इजाफा हुआ। उन्होंने धीरे धीरे मदद लेकर चलना शुरू कर दिया। हमने रोगी को दिये जाने वाले ओरल फॉस्फेट में कमी की है और अगले कुछ दिन में पूरी तरह इसे बंद करने की उम्मीद है।