अखिल भारतीय न्यायिक सेवा की पक्षधर है मोदी सरकार : पी पी चौधरी

नयी दिल्ली,  केन्द्रीय विधि एवं न्याय, इलेक्ट्रानिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री पी पी चौधरी ने बताया है कि सरकार भारतीय प्रशासन और पुलिस सेवा की तर्ज पर अखिल भारतीय न्यायिक सेवा के पक्ष में है और इसके लिए आम सहमति बनाने की दिशा में प्रयास किये जा रहे हैं।

राज्यमंत्री पी पी चौधरी ने ‘पीटीआई भाषा’ के साथ एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘हमारी सरकार अखिल भारतीय न्यायिक सेवा की पक्षधर है। इससे हमारे पास योग्य और पर्याप्त संख्या में न्यायाधीश उपलब्ध होंगे और हम देश के विभिन्न न्यायालयों में लंबित करोड़ों मामलों का शीघ्र निपटारा करने में सफल होंगे। इसके लिए राज्य के मुख्यमंत्रियों और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के साथ बैठक करने का विचार किया जा रहा है।’’ चौधरी ने बताया, ‘‘सर्वोच्च न्यायालय और विधि आयोग ने भी इसके लिए अनुशंसा की है। लेकिन अधीनस्थ और जिला अदालतों में जजों की नियुक्ति का अधिकार उच्च न्यायालयों और राज्य सरकारों के पास है। ऐसे में अखिल भारतीय न्यायिक सेवा के लिए आम सहमति बनाना जरूरी है। हमारी सरकार इसके पक्ष में है और प्रयास जारी है।’’ न्यायालयों में लंबित पड़े लाखों मामलों के निपटारे के बारे में पूछे गये एक सवाल के जवाब में चौधरी ने कहा कि देश में इस समय करीब तीन करोड़ मामले विभिन्न न्यायालयों में लंबित है जिसमें से उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में करीब एक करोड़ मामले हैं और शेष करीब दो करोड़ मामले निचली अदालतों में लंबित है।

उन्होंने बताया, ‘‘निचली अदालत में न्यायाधीशों के करीब 20,000 पद हैं जिनमें से करीब 15,000 पद भरे हुये हैं और लगभग पांच हजार पद रिक्त हैं। इन पदों पर नियुक्तियों का काम राज्य सरकारों के कार्य क्षेत्र के अधीन आता है। ऐसे में केन्द्र सरकार की अपनी विवशताएं हैं और अपनी इस चिंता से केन्द्र ने राज्य सरकारों को अवगत भी कराया है। अगर अखिल भारतीय न्यायिक सेवा पर आम सहमति बन जाती है तो हम पदों को भर सकेंगे और मामलों का शीघ्र निपटारा करने में तेजी आएगी।’’