रासायनिक हमलों से निपटने के लिए तैयार रहे सेना : पर्रिकर

नई दिल्ली ,(एजेंसी):रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने अफगानिस्तान में हाल के आतंकवादी हमलों में रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल की आशंका जताते हुए आज कहा कि भारतीय सेना को किसी भी तरह की प्रतिकूल स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहना चाहिए।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा बनाये गये रडार और रैकी वाहनों जैसे रक्षा उत्पादों को आज सेना को सौंपने के लिए आयोजित कार्यक्रम में श्री पर्रिकर ने कहा कि अफगानिस्तान और उसके उत्तरी हिस्सों से कुछ रिपोर्ट आ रही हैं और इनके फोटो मैंने देखे हैं जिनमें लोगों के शरीर पर कुछ चकतें और दाग हैं जिससे रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल की आशंका पैदा होती है। उन्होंने कहा कि अभी इन खबरों की पुष्टि नहीं हुई लेकिन ये फोटो विचलित करने वाले हैं। इसे ध्यान में रखते हुए भारतीय सेना को किसी भी तरह की स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहना चाहिए।

श्री पर्रिकर ने कहा कि यद्यपि अभी देश ने परमाणु या रासायनिक हमले का सामना नहीं किया है हमें इसका मुकाबला करने के लिए हर समय तैयार रहना होगा। डीआरडीओ ने सेना को हथियारों का पता लगाने वाला रडार स्वाथि, परमाणु, रासायनिक और जैविक हथियारों की रेकी करने वाला वाहन और इन हथियारों से प्रभावित लोगों के उपचार में काम आने वाली दवाओं की किट सौंपी है। श्री पर्रिकर ने ये रक्षा उत्पाद सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत को प्रदान किये। उन्होंने इस मौके पर डीआरडीओ के वैज्ञानिकों को इन उत्पादों को बनाने तथा हाल ही में किये गये मिसाइलों के सफल परीक्षण के लिए बधाई भी दी।

इस मौके पर सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए सशस्त्र बलों विशेष रूप से सेना का आधुनिकीकरण समय की जरूरत है। डीआरडीओ के अध्यक्ष डा. एस. क्रिस्टोफर ने कहा कि नौसेना और वायु सेना को रक्षा उत्पादों से सुसज्जित करने के बाद अब सेना को रक्षा उत्पादों से लैस किया जा रहा है और यह संगठन के लिए गौरव का क्षण है। हथियारों का पता लगाने वाला रडार स्वाथि अपनी रेंज में आने वाले दुश्मन के मोर्टार, बमों और राकेट दागे जाने की जगह का तेजी से पता लगाने में सक्षम है ।

यह एक साथ कई जगहों से होने वाले हमलों पर एक साथ नजर रख सकता है। हथियारों का पता लगाने में सक्षम रडार प्रणाली से सेना की ताकत बढ़ेगी और वह तोपों के हमले से निपट सकेगी। यह प्रणाली अपनी तोपों से किये जाने वाले हमले में भी जरूरत के हिसाब से फेरबदल करने में सक्षम है। परमाणु , जैविक और रासायनिक हथियारों से किये गये हमले के प्रभाव का पता लगाने वाला रेकी वाहन प्रभावित क्षेत्रों से नमूने लेने तथा संबंधित आंकड़े जुटाने में सक्षम है।
डीआरडीओ की संस्था इनमास रासायनिक, जैविक और परमाणु हमलों के कारण उत्पन्न आकस्मिक स्थिति से निपटने तथा इससे प्रभावित लोगों के उपचार की दवाएं बना रही है। इस संस्था ने पिछले दो दशकों में व्यापक अनुसंधान के बाद ये दवाएं बनायी हैं।