चिड़ियाघर में साथी की कमी से जूझ रहे कई वन्यजीव

नयी दिल्ली,  दिल्ली के चिड़ियाघर में कई वन्यजीव साथी के अभाव का सामना कर रहे हैं। दी नेशनल जूलॉजिकल पार्क :जू: में दो मादा गैंडे , एक लकड़बग्घा, एक नर अफ्रीकी हाथी, नर तेंदुआ, जगुआर ऐसे जानवर हैं जिनके पास साथी नहीं है।

पिछले साल चिड़ियाघर में बर्ड फ्लू फैला था जिसमें 14 जलपक्षियों की मौत हो गई थी। उसके बाद से चिड़ियाघर इस संकट का सामना कर रहा है।

चिड़ियाघर के एक अधिकारी ने बताया कि बर्ड फ्लू के बाद से ‘‘जू एक्सचेंज’’ कार्यक्रम नहीं हो पाया है और इसलिए यहां कोई भी नया जानवर या पक्षी नहीं लाया जा सका है।

गैंडा मां-बेटी अंजू और मंजू के पास बीते कई वषरें से कोई नर साथी नहीं है। शंकर नाम का अफ्रीकी हाथी पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने चिड़ियाघर को भेंट किया था लेकिन उसकी साथी बोम्बई की कई वषरें पहले मौत हो गई। वह तब से अकेलेपन का सामना कर रहा है। हाल ही में यह हाथी अपने हिंसक बर्ताव के चलते खबरों में आया था जब उसने अपने महावत को घायल कर दिया था।

विशेषज्ञ बताते हैं कि अकेलेपन के शिकार पशु बैचेन हो जाते हैं और उनके व्यवहार में भी बदलाव आ जाता है।

वन्यजीव विशेषज्ञ रेणु नायर ने बताया कि साथी नहीं होने के कारण जानवर तनावग्रस्त हो जाते हैं। कई बार उनका व्यवहार हिंसक हो जाता है।

केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के मुताबिक चिड़ियाघर किसी भी वन्यजीव को छह माह से अधिक समय के लिए अकेला नहीं रख सकते। वन्यजीवों के साथियों को लाने के लिए उन्हें व्यवस्था करनी होती है।