श्री महाकाल को दूसरे दिन कराया शेषनाग धारण

श्री महाकालेश्वर मंदिर में शिवनवरात्रि उत्सव मनाया जा रहा हैं। जिसमें दूसरे दिवस आज 17 फरवरी को प्रातः श्री महाकालेश्वर मंदिर के नेवैद्य कक्ष में भगवान श्री चन्द्रमौलीश्वर का पूजन किया गया तथा कोटितीर्थ कुण्ड के पास स्थापित श्री कोटेश्वर महादेव के पूजन के पश्चात शासकीय पुजारी पं. श्री घनश्याम शर्मा के आचार्यत्व में 11 ब्राह्मणों द्वारा श्री महाकालेश्वर भगवान का अभिषेक एकादश-एकादशनी रूद्रपाठ से किया गया। उसके बाद आरती के पूर्व महाकाल को हल्दी, उपटन, इत्र आदि से स्नान कराया गया। सायं पूजन के पश्चात बाबा श्री महाकाल को नवीन नीले रंग के वस्त्र धारण करवाये गये, साथ ही भगवान श्री महाकालेश्वर का भरत पुजारी द्वारा भॉग का श्रृंगार किया गया। महाकाल को शेषनाग धारण करवाकर मुकुट, मुण्ड माला एवं फलों की माला पहनाई। कल 18 फरवरी को भगवान महाकाल घटाटोप स्वरूप में दर्शन देंगे।
श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रांगण में 16 फरवरी से 25 फरवरी तक शिवनवरात्रि निमित्त सन् 1909 से कानडकर परिवार, इन्दौर द्वारा वंशपरम्परानुगत हरिकीर्तन की सेवा दी जा रही है, इसी तारतम्य में कथारत्न हरि भक्त परायण पं. श्री रमेश कानडकर जी के शिव कथा, हरि कीर्तन का आयोजन सायं 04:00 से 06:00 बजे तक मन्दिर परिसर मे नवग्रह मन्दिर के पास संगमरमर के चबूतरे पर हो रहा है। जिसे नारदीय कीर्तन पद्धति कहते है। जिसमें कथा वाचक खडे होकर तथा स्वयं ही वाद्य बजाते हुए गद्य-पद्य की मिश्रित शैली में भगवान के चरित्र एवं लीलाओं के विषय में गुणगान करते है। अद्भुत रामायण के संदर्भ से राम-रावण भोजन की कथा बताते हुए कहा कि, वैसे तो भक्ति नौ प्रकार की होती हैं, परन्तु रावण की राम के प्रति विरोध भक्ति थी जो दसवी भक्ति है। रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न किया और श्री राम के साथ भोजन पर आमंत्रित करने के आख्यान का वर्णन किया। तबले पर संगत श्री तुलसीराम कार्तिकेय ने की।
शिवनवरात्रि पर्व होने से 16 फरवरी से 24 फरवरी तक प्रातः 09:15 से प्रातः 10:30 की आरती समाप्त होने तक तथा अपरान्हः 03:00 से 05:00 बजे तक पूजन एवं श्रृंगार के समय एवं नियमित आरती के दौरान गर्भगृह में प्रवेश बंद रहेगा, इस समय दर्शनार्थी नंदीहाल के पीछे बैरीकेट्स से दर्शन कर सकेगे।

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