“वन स्टॉप सेंटर- महिलाओं के सम्मान की रक्षा का स्थान” कराई जाती हैं कई सुविधाएं उपलब्ध

शहर के विक्रमादित्य होटल में शुक्रवार को शासन द्वारा महिला सशक्तिकरण के लिए संचालित कई कल्याणकारी योजनाओं में से वन स्टॉप सेंटर/उषा किरण योजना पर सेंटर के स्टेक होल्डर्स के प्रशिक्षण हेतु जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में वन स्टॉप सेंटर के महत्व, उनके द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाएं, महिलाओं के विरूद्ध होने वाली हिंसा और महिलाओं के संरक्षण के लिए बनाये गये प्रमुख अधिनियमों पर विस्तार से राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स द्वारा प्रस्तुतीकरण व खुली चर्चा की गई।
‘वन स्टॉप सेंटर’ (सखी)/ उषा किरण योजना के बारे में चर्चा के दौरान बताया गया कि वन स्टॉप सेंटर में सभी प्रकार की हिंसा से पीड़ित महिलाओं एवं बालिकाओं को अस्थाई आश्रय, पुलिस डेस्क, विधि सहायता, चिकित्सा एवं काउंसीलिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। इसका उद्देश्य एक ही छत के नीचे हिंसा से पीड़ित महिलाओं और बालिकाओं को एकीकृत रूप से सहायता एवं सहयोग प्रदाय करना है। पीड़ित महिला को तत्काल आपातकालीन एवं गैर आपातकालीन सुविधाएं वन स्टॉप सेंटर के माध्यम से मुहैया कराई जाती हैं।
उल्लेखनीय है कि उज्जैन म.प्र. के उन चुनिंदा जिलों में से एक है जहां जिला स्तरीय वन स्टॉप सेंटर शासकीय माधवनगर चिकित्सालय में स्थापित किया गया है। जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारी ने बताया कि वन स्टॉप सेंटर में अभी तक मात्र 2 ही प्रकरण आये हैं जिनका सफलता पूर्वक निराकरण भी किया जा चुका है। आवश्यकता पड़ने पर वन स्टॉप सेंटर के दूरभाष नं. 0734-2530517 पर संपर्क किया जा सकता है।
‘वन स्टॉप सेंटर’ का प्रमुख उददेश्य हिंसा से पीड़ित महिलाओं व 18 वर्ष से कम आयु की बालिकाओं को सहायता प्रदाय करना है। इसके अलावा लैंगिक अपराधों से बालकों के संरक्षण अधिनियम 2012 और किशोर न्याय अधिनियम 2015 के अंतर्गत गठित संस्थाओं को सेंटर से जोड़ना है। सेंटर में हिंसा से पीड़ित महिलाओं के बचाव और उन्हें रैफरल सेवाएं प्रदान की जाती हैं। इसमें वर्तमान में कार्यरत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, मुख्यमंत्री महिला हेल्प लाईन 181, 1090, 108 की सेवाएं देना, पीसीआर वेन को केंन्द्र से संबद्ध करना, हिंसा से पीड़ित महिला को घटना की जगह से बचाव करना, समीपस्थ स्वास्थ्य सुविधा(शासकीय/अशासकीय) और आश्रय गृह की सुविधा प्रदान की जाती है।
सेंटर में महिलाओं को एफआईआर/एनसीआर/डीआईआर दर्ज कराने की सुविधाएं भी दी जाती हैं। इसके साथ ही पीड़िता के साथ हुई हिंसा की प्रकृति अनुसार चिंहित कुशल मनोसामाजिक परामर्शदाताओं के पेनल के माध्यम से सेवाएं दी जाती हैं। मनोसामाजिक परामर्श के साथ ही उन्हें विधिक सहायता एवं परामर्श भी दिया जाता है। विधाई-कार्य विभाग द्वारा संवेदनशील एवं समर्पित अधिवक्ताओं का चिंहित पैनल सेंटर में ही हिंसा से पीड़ित महिला को न्याय दिलाने के लिए विधिक सहायता एवं परामर्श देता है। अधिवक्ता की यह भी जबावदारी होती है कि पीड़िता के लिए विधिक प्रणाली का सरलीकरण किया जाये एवं न्यायालय में सुनवाई से उसे छूट प्रदान करने हेतु न्यायालय में अपना पक्ष रखा जाये।
पुलिस एवं न्यायालय प्रकरणों के निश्चित समय सीमा में निराकरण हेतु ‘वन स्टॉप सेंटर’ पर महिलाओं को ‘वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग’ की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है । इस सुविधा के माध्यम से यदि पीड़िता चाहती है, तो दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 161(3),164(1),एवं 275(1) के अनुसार आडियो, विडियो या इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के माध्यम से अपने बयान पुलिस/न्यायालय में सेंटर से ही दर्ज करा सकती हैं।
उषा किरण योजना

कार्यशाला में वन स्टॉप सेंटर के संचालन से जुड़े विभाग एवं उनकी भूमिकाओं पर भी प्रकाश डाला गया। इस दौरान जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारी श्री साबिर एहमद सिद्दीकी, संभागीय उप संचालक महिला सशक्तिकरण शुभांगी मजूमदार, एडीपीओ श्रीमति कमलेश श्रीवास, सीडीपीओ उज्जैन एकीकृत बाल विकास श्रीमति झनक सोनाने, विशेष पुलिस ईकाई के एएसआई श्री भागीरथ जाट, सीडीपीओ उन्हेंल श्रीमति पुष्पा देवी राव, बड़नगर श्रीमति हेम कुमारी, किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य श्री लोकेश शर्मा सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी और समाजसेवी मौजूद थे। कार्यशाला का संचालन विधि सह परीविक्षा अधिकारी प्रियंका त्रिपाठी द्वारा किया गया।