हाफिज की नजरबंदी के मायने

पहली नजर में जमात-उद-दावा के संस्थापक और उसके प्रमुख हाफिज सईद को पाकिस्तान सरकार द्वारा नररबंद किया जाना हमारे लिए संतोष का विषय होना चाहिए। केवल नजरबंद ही नहीं किया गया, बल्कि उस पर एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान सरकार ने उसका नाम एग्जिट कंट्रोल लिस्ट में डाल दिया है। इस सूची मंे नाम डालने का मतलब है कि हाफिज सईद देश से बाहर नही जा सकता है। उसके साथ अकेले ऐसा नहीं किया गया है। 37 अन्य पर भी देश छोड़ने की पाबंदी लगाई है। पाकिस्तान के आंतरिक मंत्रालय ने सभी प्रांतीय सरकारों और जांच एजेंसी को पत्र भेजा है जिसमें 38 लोगों के नाम हैं। ये सभी जमात और लश्कर से जुड़े हुए बताए गए हैं। आंतरिक मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 1267 प्रतिबंधों के आधार पर हाफिज का नाम एसीएल में डाला है। इसके अलावा हाफिज के तीनों संगठनो, जमात लश्कर और फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन को भी इस सूची में शामिल किया गया है। साथ ही, मंत्रालय द्वारा जारी एक अधिसूचना के मुताबिक, हाफिज मुहम्मद सईद, अब्दुल्ला उबैद, जफर इकबाल, अब्दुर रहमान आबिद और काजी काशिफ नियाज कथित तौर पर इन तीनों संगठनों के सक्रिय सदस्य हैं। इसीलिए उन्हें नजरबंद रखा जाना चाहिए। हाफिज को 90 दिनों तक घर में नजरबंद रखने का आदेश दिया गया है। पंजाब प्रांत के कानून मंत्री राणा सनाउल्ला का बयान आया है कि आने वाले दिनों में जमात-उद-दावा एवं फलाह-ए-इंसानियत के और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया जाएगा। राणा ने कहा कि हम जमात एवं एफआईएफ के संदिग्ध आतंकियों की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं तथा आतंकवाद विरोधी लोगों को हिरासत में लिया जाएगा। यही नहीं राणा ने उसकी गिरफ्तारी को राष्ट्रीय हित से भी जोड़ा है। ऐसा पहली बार हुआ है। ध्यान रखिए, हाफिज पंजाब का ही निवासी है।

इन कदमों तथा ऐसे बयानों से लग सकता है कि पाकिस्तान सरकार वाकई इस बार हाफिज सईद और उसके साथियों को उनके किए की सजा देने को तैयार है। आखिर वहां के वाणिज्य मंत्री ने कहा है कि हाफिज एवं उसके साथ अन्य लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। यह बड़ी बात लगती है। हालांकि किस मामले में प्राथमिकी दर्ज होगी यह उन्होंने नहीं बताया। हमारे लिए हाफिज सईद एक आतंकवादी है जिसने मुंबई हमलों को अंजाम दिलाने में मुख्य भूमिका निभाई। वह ऐसा आतंकवादी है जो जम्मू कश्मीर में आतंकवाद को सरेआम समर्थन देता है, उसकी यथासंभव सहायता भी करता है। उसके खिलाफ कार्रवाई की भारत की मांग पुरानी है। लेकिन उसे केवल नजरबंद किए जाने भर से भारत उत्साहित नहीं हो सकता। आखिर मुंबई हमले के बाद उसे दो बार नजरबंद किया गया और दोनों बार अदालत के आदेश से वह बाहर आ गया। इसका कारण यही है कि उसके खिलाफ जितनी सख्त धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज होना चाहिए नहीं किया गया। इस बार भी उसे नजरबंद तो किया गया है, लेकिन पाकिस्तान के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता का एक बयान यह भी है कि भारत यदि चाहता है कि हाफिज को सजा दिलाई जा सके तो ऐसे सबूत दे जो अदालत में टिक सके। यानी नजरबंद हमने किया है, प्राथमिकी हम दर्ज करेंगे लेकिन उसे सजा दिलाने का सबूत तो भारत को ही देना होगा।

समस्या की जड़ यही है। यही पर पाकिस्तान का असली चेहरा उजागर हो जाता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरुप ने इसका ठीक जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि भारत अब आतंकवाद के खात्मे के लिए उठाए गए कदमों के पाकिस्तान के दावों या बयानों का भरोसा नहीं करता है। वह सिर्फ जमीनी हकीकत पर ही विश्वास करता है। मुंबई में हुए आतंकी हमले की पूरी साजिश पाकिस्तान में रची गई थी। सारे आतंकी पाकिस्तान से ही आए थे। इसलिए मुंबई हमले के मास्टरमाइंड को साबित करने वाले सारे सबूत भी पाकिस्तान में ही हैं। भारत को जितना सबूत देना था वह दे चुका है। वास्तव में भारत ने डोजियर बनाकर पाकिस्तान को उसके खिलाफ सबूत सौंपे हैं। उसके बाद यह पाकिस्तान की जांच एजेंसियों की जिम्मेवारी बनती थी कि पूरी तरह छानबीन कर उन सबूतों को और पुख्ता बनाए। साजिश उसकी धरती से रची गई तो उसका सबूत भारत में कैसे हो सकता है। हमारे पास तो एक पकड़ा गया आतंकवादी कसाब था जिसने न्यायालय में सारे बयान दे दिए। उसके बाद हमारे पास सेटेलाइट फोन से की गई बातचीत के टेप थे। ये सब पाकिस्तान को सौंप दिए गए। यही नंहीं अमेरिका का सार्वजनिक बयान है कि मुंबई हमले की साजिश पाकिस्तान में रची गई। उसमें अमेरिका के नागरिक भी मारे गए थे। इस कारण जांच उसने भी की।

पाकिस्तान अब तक केवल बहाना बनाता रहा है। हमले के जो तथ्य सारी दुनिया को सही लगे उसे पाकिस्तान की अदालत स्वीकार न करे तो इसमें भारत कुछ नहीं कर सकता है। हाफिज सईद के प्रति पाकिस्तान की पूर्व एवं वर्तमान दोनांे सरकारों का रवैया अस्वीकार्य स्तर का टालमटोल का रहा है। कभी लगा ही नहीं कि पाकिस्तान सरकार के पास उसे सही तरीके से कानून कठघरे में खड़ा कर सजा दिलाने का है। इसलिए वो सारी जिम्मेवारी भारत पर थोपते रहे। आश्चर्य की बात है कि पाकिस्तानी सेना का यह बयान सामने आ चुका है कि हाफिज के खिलाफ कार्रवाई देशहित में है। पहले लगता था सेना शायद रास्ते की बाधा है किंतु उसका सार्वजनिक बयान हमारे सामने है। तो क्या इस बार भी सबूत के अभाव के बहाने में हाफिज और उसके अन्य साथी छूट जाएंगे? नजरबंद किए जाने के बाद उसने जिस तरह वीडियो बयान जारी किया है उससे पाकिस्तान की पुलिस पर से ही विश्वास उठ जाता है। उसने बाजाब्ता पत्रकार वार्ता को भी संबोधित किया। ऐसा कैसे संभव है? एक आतंकवादी को इतना महत्व दिए जाने का अर्थ क्या है? साफ है कि पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठान में उसके समर्थक या उसके प्रति गहरी सहानुभूति रखने वाले हैं, अन्यथा वह किसी कीमत पर वीडियो संदेश जारी नहीं कर सकता था।

यह माना जा रहा है कि इस बार की गिरफ्तारी के पीछे अमेरिका के नए प्रशासन का भय या दबाव है। डोनाल्ड ट्रपं प्रशासन ने आतंकवाद के खिलाफ जो कठोर रवैया अपनाया है उससे पाकिस्तान के अंदर भय महसूस किया जाना स्वाभाविक है। यह गिरफ्तारी भी ट्रंप और मोदी की बातचीत के बाद हुई है। ट्रंप और मोदी मंें लंबी बातचीत हुई। आतंकवाद और उसमेें पाकिस्तान की भूमिका अवश्य बातचीत में आई होगी। इस संबंध में विकास स्वरूप ने कहा कि ट्रंप प्रशासन के साथ उच्च स्तर पर बातचीत हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ट्रंप के अलावा विदेश सचिव और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बात कर चुके हैं। स्वाभाविक है कि सारे मुद्दों पर बात हुई। विकास स्वरूप के मुताबिक हमें भरोसा है कि सीमा पर से फैलाए जा रहे आतंकवाद पर हमारे रुख की अमेरिका को जानकारी होगी और पाकिस्तान को भी पता होगा कि उसको क्या करना है। पाकिस्तानी मीडिया ने यह कहा है कि हाफिज और अन्यों की नजरंबंदी तथा अन्य कार्रवाई अमेरिका के दबाव में किया गया है।यदि ऐसा है तो फिर पाकिस्तान के लिए उसे रिहा करना आसान नहीं होगा। ट्रपं प्रशासन इस बावत पाकिस्तान सरकार से पूछ सकता है।

हालांकि पाकिस्तान में हाफिज सईद के समर्थक सरकार के खिलाफ सड़कों पर भी उतरे हैं। नवाज सरकार को दबाव मंें लाने के लिए यह कहा जा रहा है कि वह अमेरिका के सामने घुटने टेक रहा है। पाक मीडिया का एक वर्ग भी यही कह रहा है। मीडिया का वह वर्ग तो यहां तक कहा रहा है कि अब देखना होगा कि अमेरिका को खुश करने के लिए सरकार किस हद तक गिरेगी। अगले वर्ष पाकिस्तान में चुनाव है। इसे देखते हुए नवाज शरीफ को पूरी तरह दबाव में लाने की भी कोशिश है। तहरीक-ए-इंसाफ की ओर से इसका विरोध किया गया है। पार्टी कह रही है कि अमेरिका और भारत की वजह से तो सईद के खिलाफ कार्रवाई की है, उसे कश्मीरियों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने की भी सजा दी जा रही है। तहरीक उसे देशभक्त घोषित कर रहा है। एक ओर सरकार की अब तक की बेमन की कार्रवाई और दूसरी ओर विपक्ष का हमला….ऐसे में हम विश्वास नहीं कर सकते कि वाकई पाकिस्तान हाफिज को उसके कानूनी अंजाम तक पहुंचा देगा। हालांकि इस पर ओबामा की जगह उसका सामना ट्रंप से है। तो हम देखें कि क्या होता है।

-अवधेश कुमार