शुक्र और मंगल पर नजर जमाए इसरो रच सकता है बड़ा विश्व रिकॉर्ड

भारत पहली बार शुक्र पर पहुंचने जा रहा है और जल्द ही वह एक बार फिर लाल ग्रह मंगल पर अपनी वापसी करेगा।

नए प्रारूप वाले इलेक्ट्रॉनिक बजट के सैकड़ों दस्तावेजों के बीच सरकार की ओर से पृथ्वी के ठीक पड़ोसी ग्रहों पर नई अंतर-ग्रही यात्राओं से जुड़ी पहली औपचारिक स्वीकारोक्ति दर्ज है।

यह खबर ऐसे समय आई है, जब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन :इसरो: अपने एक बड़े प्रक्षेपण की कोशिश कर रहा है। इस बड़े प्रक्षेपण के तहत वह अंतरिक्ष में दो या तीन नहीं, बल्कि पूरे 104 उपग्रह एक ही अभियान के तहत प्रक्षेपित करेगा।

दुनिश के किसी भी अन्य देश ने एक ही अभियान में सौ उपग्रह प्रक्षेपित करने की कोशिश तक नहीं की है। पिछला विश्व रिकॉर्ड रूस के नाम है, जिसने वर्ष 2014 में एक ही अभियान में 37 उपग्रह प्रक्षेपित किए थे। इसके लिए उसने परिष्कृत अंतर-द्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया था।

यदि सबकुछ योजना के अनुरूप चलता है तो 15 फरवरी की सुबह इसरो पीएसएलवी के इस्तेमाल से तीन भारतीय और 101 छोटे विदेशी उपग्रह अंतरिक्ष में भेजेगा।

भारत पिछले विश्व रिकॉर्ड की तुलना में बेहतर करने और वह भी ढाई गुना बेहतर करने की कोशिश कर रहा है। अरबों डॉलर के प्रक्षेपण बाजार के नए खिलाड़ी इसरो को उम्मीद है कि वह इस दिशा में एक अहम मापदंड स्थापित करेगा।

अंतरिक्ष के प्रति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रेम सर्वविदित है। ऐसा लगता है कि सरकार भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी से प्रसन्न है और तभी वित्त मंत्री अरण जेटली ने बजट में अंतरिक्ष विभाग के लिए 23 प्रतिशत का भारी इजाफा किया है। अंतरिक्ष विज्ञान के हिस्से में, बजट में ‘‘मंगलयान अभियान.2 और शुक्र अभियान’’ का जिक्र है।

मंगल के लिए दूसरे अभियान की अवधि 2021..22 रखी गई है। मौजूदा योजनाओं की मानें तो इसमें लाल ग्रह पर एक रोबोट उतारा जाना भी शामिल है।

भारत का वर्ष 2013 का पहला मंगल अभियान पूरी तरह भारतीय था लेकिन इस बार मार्स रोवर बनाने में फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी समन्वय करना चाहती है।