बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत फल, सब्जियों की फसल नुकसान की भारपायी की जायेगी : कृषि मंत्री

नयी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को किसानों के हितों का पोषण करने वाली अब तक की सर्वश्रेष्ठ योजना करार देते हुए कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि अगर कोई राज्य सरकार फल या सब्जी का औसत उत्पादन 10 प्रतिशत अधिक होने और मूल्य में 10 प्रतिशत की गिरावट होने पर बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत नुकसान भरपाई का प्रस्ताव भेजेगी तो उसे तत्काल मंजूरी दी जायेगी।

सिंह ने ‘भाषा’ से बातचीत में कहा, ‘‘आपदाओं के कारण अगर कहीं नुकसान हुआ है तो इसके लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और प्रधानमंत्री मौसम आधारित बीमा योजना है और इसके तहत राहत प्रदान की जा रही है।’’ जल्दी नष्ट हो जाने वाली फसलों का उत्पादन करने वाले किसानों की चिंताओं के बारे में पूछे जाने पर कृषि मंत्री ने कहा, ‘‘अगर राज्य सरकारें बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत फल या सब्जी के नुकसान के बारे में प्रस्ताव देती हैं और वहां उत्पादन 10 प्रतिशत से ज्यादा बढा हो लेकिन कीमत में 10 प्रतिशत की कमी आई हो, तब उस प्रस्ताव को मंजूरी दी जायेगी और सहायता प्रदान की जायेगी।’’ उन्होंने कहा कि देश में अनाज का जितना उत्पादन हो रहा है, निश्चित रूप से उपभोक्ताओं तक पहुंचने के क्रम में उसमें से 10 प्रतिशत का नुकसान होता है । इसी प्रकार फल एवं सब्जियों का जितना उत्पादन होता है, उसमें से 22 प्रतिशत तक का उपभोक्ताओं तक पहुंचने के क्रम में नुकसान होता है। इसको ध्यान में रखते हुए सरकार ने शीतगृह से लेकर खाद्य प्रसंस्करण आदि की योजनाओं को तेज किया है। इन्हें मिशन के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है।

फसल बीमा योजना के कारगर नहीं होने की आलोचनाओं पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नयी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ हुआ है। यह इस बात से स्पष्ट होता है कि पिछले वर्ष खरीफ फसल में देश में 3.15 करोड़ किसानों ने बीमा कराया था। इनमें से 3 करोड़ किसान ऐसे थे जो रिण लेते थे लेकिन 15 लाख किसान ऐसे भी थे जो रिण नहीं लेते थे हालांकि उन्होंने बीमा करा रखा था।

सिंह ने कहा कि इस बार खरीफ में आई नई कृषि बीमा योजना में किसानों को पूरा मुआवजा मिल रहा है और इस बार 1.10 करोड़ ऐसे किसानों ने बीमा कराया जो रिण नहीं लेने वाले थे । इससे स्पष्ट होता है कि नयी प्रधानमंत्री कृषि बीमा योजना को लेकर किसानों में आकषर्ण बढ़ा है । गांव और किसानों के प्रति मोदी सरकार की प्रतिबद्धता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कृषि विकास दर बढ़कर 4.1 प्रतिशत होने का अनुमान दर्शाता है कि सरकार किसानों और खेतीबाड़ी की बेहतरी के लिए कितनी गंभीरता से काम कर रही है । बजट में किसानों की आय 5 वषरे में दोगुनी करने की सरकार की प्रतिबद्धता का प्रकटीकरण हुआ है ।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2016-17 के लिए बजट प्रावधान 44,250 करोड़ रुपये से बढ़ाकर वर्ष 2017-18 के लिए 51,026 करोड़ रुपये किया गया है जो उल्लेखनीय हैं।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने कहा कि सरकार ने पूर्व की योजनाओं को गतिमान बनाने का प्रावधान किया है। साथ ही श्वेत एवं नीली क्रान्ति के संकल्प को भी इस बजट में उजागर किया गया है। आम बजट में कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए दूरदर्शी योजनाएं गढ़ी गई हैं. जैसे प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए नौ हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया जाना। इससे किसानों की फसल सुरक्षा का दायरा बढ़ जाएगा।

सिंह ने कहा कि इस बजट में कृषि एवं किसानों को सुरक्षा कवच प्रदान किया गया है। सरकार ने दस लाख तालाब बनाने की बात की है। यह बहुत ही बड़ा और सराहनीय कदम है। तालाबों से किसान सिंचाई के साथ-साथ मछली पालन कर अपनी आय को दुगना कर सकेंगे। पिछले साल पांच लाख तालाब बनाए गए थे।

उन्होंने कहा कि वन ड्रॉप मोर क्रॉप योजना के तहत पांच हजार करोड़ रुपये के दीर्घकालीन सिंचाई कोष से अब उन क्षेत्रों में भी सिंचाई के लिए पानी पहुंचाया जा सकेगा, जहां अभी तक पानी नहीं पहुंचता था।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नीली क्रान्ति सरकार की एक अहम प्राथमिकता है जिसके मद्देनजर वर्ष 2016-17 के 247 करोड़ रुपये के बजटीय प्रावधान को 62.35 प्रतिशत बढ़ाकर 401 करोड़ रुपये किया गया है।