पत्रकारिता अपनी भाषा तथा संस्कृति से विमुख होती जा रही है

उज्जैन। वरिष्ठ पत्रकार (दैनिक देशबन्धु (भोपाल) के सम्पादक पलाश सुरजन ने कहा कि आजादी की लड़ाई के समय पत्रकारिता मिशन के रूप में काम करती थी। वह आज शुद्ध व्यापार बन गई है। वर्तमान में पत्रकारिता अपनी भाषा तथा संस्कृति से भी विमुख होती जा रही है। हिन्दी पत्रकारिता में अंग्रेजी शब्दों का प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है। इसका कारण यह है कि जो ताकतें तेजी से बाजार चला रही है उनकी भाषा अंग्रेजी है। इतना ही नहीं संस्कृति से भी लोगों को दूर किया जा रहा है।

सुरजन डा. राजेन्द्र जैन सभागृह में ‘‘पत्रकारिता का वर्तमान परिदृश्य’’ विषय पर आयोजित स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पूर्व सांसद पत्रकार स्व. कन्हैयालाल वैद्य की स्मृति में ४२वीं वैद्य स्मृति व्याख्यानमाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अखबारों के संस्करण सभी स्थानों से निकलने लगे हैं लेकिन खबरों का दायरा सीमित हो गया है। पड़ोसी जिलों की खबरें पा’कों को पढ़ने को नहीं मिलती। विज्ञापनों एवं प्रचार को समाचार की शक्ल दी जा रही है। जो पत्रकारिता के लिये घातक है। नोटबंदी की तकलीफ हकीकत से दूर रखने की कोशिश कर रही है। आज की पत्रकारिता संस्कृति से भी दूर कर रही है। अखबार बताते हैं कि आपको खाना और क्या पहनना चाहिये। ग्रामीण क्षेत्र की समस्याएं अखबारों की प्राथमिकता नहीं है। शहर में अफसर के कुत्ते की मौत खबर बनती है। आज की पत्रकारिता सामाजिक सरोकार से दूर होती जा रही है। वैश्विकरण के साथ पत्रकारिता का पतन होता गया। टेव्नâालॉजी के विस्तार का नुकसान यह हुआ कि पत्रकारों ने मेहनत करना छोड़ दिया।

कार्यक्रम को विशेष अतिथि शिवपुरी के ९१ वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं वरिष्ठ पत्रकार प्रेमनारायण नागर ने संबोधित करते हुए कहा कि आजादी के आंदोलन से तथा उसके संघर्ष से नई पीढ़ी को प्रेरणा लेनी चाहिए कि किस प्रकार सेनानियों ने अत्याचार सहन कर देश को आजादी दिलाई। श्री नागर ने स्व. वैद्यजी का स्मरण करते हुए कि वैद्यजी का मानना था कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने देश की सेवा की थी, कोई नौकरी नहीं इसलिये उन्होंने पेंशन शब्द के विरोध में एक प्रस्ताव भी पारित किया था।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्री अमृतलाल अमृत ने वैद्यजी को जुझारू ल़डावूâ, नेता, पत्रकार बताते हुए कहा कि उनके विचार आज भी प्रासंगिक है। थांदला नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष श्री नारायण भट्ट ने कहा कि वैद्यजी की लेखनी, विचारों और वाणी ने अंग्रेज सरकार को झुकने पर मजबूर किया। समारोह की अध्यक्षता करते हुए पूर्व सांसद सत्यनारायण पंवार ने कहा कि नई पीढ़ी को स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन से प्रेरणा मिलती है। वैद्यजी जैसे पत्रकारों ने अपनी कलम से देश के हुक्मरानों की जड़ें हिला दी। आपने कहा कि नोटबंदी से उपजी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।

इस अवसर पर पत्रकारिता क्षेत्र में विगत ५० वर्षों से सक्रिय धार की वरिष्ठ पत्रकार श्रीमती पुष्पा शर्मा को शाल-श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया गया। राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा की ओर से के.सी. यादव तथा अतिथियों द्वारा, पत्रकारों को सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर समाजसेवी सुधीर भाई, कृष्णमंगल सिंह कुलश्रेष्ठ, अभि. सुभाष गौड़, राजेन्द्र व्यास, डा. शिव चौरसिया, वरिष्ठ पत्रकार अनिल सिंह चन्देल, सरेन्द्र शर्मा (एड.) विश्वास शर्मा, राकेश नागर सहित अनेक गणमान्य नागरिक, साहित्यकार, समाजसेवी आदि भारी संख्या में उपस्थित थे।

कार्यक्रम में तत्कालीक जनअभिव्यक्ति विषय पर डा. देवेन्द्र जोशी, हरीश जौहरी, आनन्दीलाल गांधी आदि ने अपने ओजस्वी विचार भी रखे।

कार्यक्रम का संचालन नरेश सोनी ने किया एवं कु. क्रान्ति वैद्य ने आभार व्यक्त किया।