नोटबंदी का असर रेस्त्रां कारोबार पर भी

उज्जैन।  सरकार के नोटबंदी के फैसले का असर शहर के कुछ रेस्टोरेंट पर भी दिख रहा है जिनका कहना है कि उनके ग्राहकों की संख्या घटी है। वहीं छुट्टे की कमी का असर ढाबे व रेहड़ी आदि के जरिए खाना बेचने वालों पर सबसे अधिक हुआ है जिनके पास इलेक्ट्रिक भुगतान की सुविधा नहीं है।

सरकार ने 500 व 1,000 रपये के मौजूदा नोटों का प्रचलन 8 नवंबर को बंद करने की घोषणा की। इसके बाद से ही लोगों के पास नकदी की कमी देखने को मिल रही है।

हालांकि, प्रमुख रेस्टोरेंट व ढाबों में तो डेबिट या क्रेडिट कार्ड तथा मोबाइल वालेट से भुगतान किया जा सकता है लेकिन सबसे ज्यादा मार रेहड़ी, खोमचे वाले व अन्य ढाबों पर पड़ी है।

ऑनलाइन रेस्त्रां खोज व खाना आपूर्ति सेवा देने वाली जोमातो ने ‘कैश ऑन डिलीवरी’ सेवा अस्थाई तौर पर बंद कर दी है। वहीं अनेक रेस्टोरेंट अपने ग्राहकों से ऑनलाइन भुगतान का आग्रह कर रहे हैं।

कनाट प्लेस में एक ढाबा चलाने वाले राजवीर सिंह ने कहा, ‘हम किफायती दरों पर खाना परोसते हैं और कार्ड से भुगतान की सुविधा नहीं हैं। पहले हमारे यहां भीड़ लगी रहती थी लेकिन अब लोग दाल मक्खनी या शाही पनीर के लिए तो चैक से भुगतान नहीं कर सकते। इसलिए जिन ग्राहकों के पास नकदी नहीं होती उन्हें वापस लौटाना पड़ता है।’ अनेक खुदरा स्टोरों व रेस्टोरेंट ने तो सरकार के नियमों के अनुपालन संबंधी नोटिस अपने दरवाजे पर लगा दिए हैं।

रेस्टोरेंट शृंखला ‘तवक’ के पार्टनर दीपांकर अरोड़ा ने कहा, ‘चूंकि अभी पर्याप्त मात्रा में नये नोट प्रचलन में नहीं आए हैं इसलिए हमारे ग्राहक कार्ड या अन्य भुगतान माध्यमों का इस्तेमाल कर रहे हैं। लोग नकदी के बजाय ऑनलाइन या एप्प आधारित आर्डर कर रहे हैं।’