महाकवि कालिदास जीवन की समग्रता के कवि हैं – राज्यपाल श्री ओ.पी.कोहली

उज्जैन। महाकवि कालिदास जीवन की समग्रता के कवि हैं। कालिदास न होते तो संस्कृत साहित्य इतना समृद्ध नहीं होता। उन्होंने अपनी कृतियों में मानव एवं प्रकृति के सौन्दर्य का अद्भुत चित्रण किया है। वे संस्कृति एवं साहित्य के धनी थे। कालिदास ने अपने नाटकों की शुरूआत शिव की आराधना से की। वे बेजोड़ कवि एवं नाटककार हुए हैं। उनके नाटकों की भूरि-भूरि प्रशंसा विश्व में की गई है। कालिदास ने अपनी रचनाओं में मानवीय संवेदनाओं व प्रकृति का चित्रण किया है। जर्मन कवि गेटे कालिदास के नाटक अभिज्ञानशाकुंतलम पर इतने मुग्ध थे कि उन्होंने इसकी प्रशंसा की। कालिदास राष्ट्रीय एकता के भी प्रणेता थे। उनकी रचनाओं में इतिहास और सम्पूर्ण भारत की दिग्विजय की कथा की झलक मिलती है। भूगोल को भी रसमय बना देना, यह केवल कालिदास की क्षमता ही थी। कालिदास ने केवल अकेले यक्ष की ही नहीं, मानवमात्र की विरह संवेदनाओं का चित्रण किया है। वे प्रेम के आरोहण व उन्नयन के कवि हैं। यह बात राज्यपाल श्री ओ.पी.कोहली ने आज कालिदास समारोह के उद्धाटन अवसर पर कही।

   इसके पूर्व राज्यपाल श्री ओ.पी.कोहली ने कवि कालिदास के चित्र एवं पं.सूर्यनारायण व्यास के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलित किया। इस अवसर पर केन्द्रीय मंत्री श्री थावरचन्द गेहलोत, ऊर्जा मंत्री श्री पारस जैन, पर्यटन मंत्री श्री सुरेन्द्र पटवा, सारस्वत अतिथि श्री अर्कनाथ चौधरी, कुलपति विक्रम विश्वविद्यालय श्री एस.एस.पाण्डेय, सांसद डॉ.चिन्तामणि मालवीय, महापौर श्रीमती मीना जोनवाल, विधायक डॉ.मोहन यादव, प्रमुख सचिव संस्कृति श्री मनोज श्रीवास्तव आदि मौजूद थे। इसके बाद राष्ट्रगान की धुन बजाई गई, मध्य प्रदेश गान हुआ। स्वागत भाषण विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.एस.एस.पाण्डेय द्वारा दिया गया। स्वागत भाषण के उपरान्त प्रो.अर्कनाथ चौधरी ने सारस्वत भाषण संस्कृत में दिया।

राष्ट्रीय कालिदास सम्मान रंगकर्म पर राज बिसारिया एवं बंसी कौल को

   समारोह में राज्यपाल श्री ओ.पी.कोहली ने वर्ष 2015-16 एवं 2016-17 के लिये राष्ट्रीय कालिदास सम्मान रंगकर्म पर श्री राज बिसारिया एवं बंसी कौल को प्रदान किया। उन्हें शाल, श्रीफल एवं सम्मान-पत्र के साथ दो-दो लाख रूपये के चेक प्रदान किये गये। वर्ष 2015-16 के लिये सम्मानित किये गये रंगकर्मी श्री राज बिसारिया ने अपने गहरे रूझान के चलते रंगकर्म के क्षेत्र में अनेक महत्वपूर्ण उपलब्धियां प्राप्त की हैं। इसमें ब्रिटिश थिएटर एसोसिएशन, एसोसिएट ड्रामा बोर्ड आदि के सम्मान शामिल हैं। उन्होंने कई चर्चित नाटकों का प्रस्तुतीकरण निर्देशक के रूप में किया है।

   इसी तरह वर्ष 2016-17 के लिये सम्मानित राष्ट्रीय कालिदास सम्मान प्राप्तकर्ता रंगकर्मी बंसी कौल ने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से डिप्लोमा अर्जित करने के बाद निर्देशन, अभिनय, प्रकाश, मंच सज्जा, वेशभूषा आदि में अपने बहुआयामी कल्पनाशील सोच से अनूठे एवं अद्वितीय प्रयोग किये। उन्होंने दुर्लभ शैलियों को संरक्षण प्रदान किया तथा लोक और नागरी तत्वों का सफल समन्वय किया।

   समारोह के अन्त में आभार संस्कृति राज्य मंत्री श्री सुरेन्द्र पटवा ने प्रकट किया। अन्त में भरतवाक्य का गायन किया गया तथा पुलिस बैण्ड द्वारा राष्ट्रधुन बजाई गई। कार्यक्रम का संचालन प्रो.बी.के.शर्मा ने किया। इस अवसर पर विधायक श्री बहादुरसिंह चौहान, सतीश मालवीय, उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री जगदीश अग्रवाल, संभागायुक्त डॉ.रवीन्द्र पस्तोर, आईजी श्री व्ही.मधुकुमार, डीआईजी श्री राकेश गुप्ता, कलेक्टर श्री संकेत भोंडवे, पुलिस अधीक्षक श्री एम.एस.वर्मा, कालिदास संस्कृत अकादमी के निदेशक श्री पी.के.झा, पूर्व विधायक श्री माधवप्रसाद शास्त्री, पूर्व संभागायुक्त डॉ.मोहन गुप्त सहित गणमान्य नागरिक मौजूद थे।